103 : 1
وَٱلْعَصْرِ
अस्र के समय की क़सम!
103 : 2
إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَفِى خُسْرٍ
निःसंदेह इनसान घाटे में है।1
103 : 3
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْحَقِّ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ
सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए और एक-दूसरे को सत्य की ताकीद की और एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की।1